Descrição
श्रीमद्भगवद्गीता भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ग्रन्थों में महानतम् है। अन्तर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद ने श्रीमद्भगवद्गीता का अनुवाद सर्वप्रथम १९६७ ई. में किया था, जिसमें प्रत्येक श्लोक को प्रकाशदायी व्याख्या के साथ प्रस्तुत किया गया था। पश्चिमी देशों में हाल ही में आने के कारण, वे उस समय पुस्तक का मुद्रण नहीं करा सके थे। अतः श्रीमद्भगवद्गीता का जो परिचय उन्होंने लिखा था, उसका मुद्रण पहले अलग से एक पुस्तिका के रूप में हुआ। यह पुस्तिका उस परिचय का पुनर्मुद्रण है। पाठक इसमें श्रीमद्भगवद्गीता के दर्शन का सम्पूर्ण विश्लेषण स्पष्ट व निर्विवाद रूप में पायेंगे। यह परिचय उन लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण है, जो श्रीमद्भगवद्गीता में पहली बार रुचि ले रहे हैं। श्रील प्रभुपाद ने दूसरी प्रस्तुतियों व अनुवादों से भिन्न व्यक्तिगत मनोधर्म तथा व्याख्या से मुक्त श्रीमद्भगवद्गीता को उस के मूल रूप में प्रस्तुत किया है। वे हमारा ध्यान भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में दिये गए वास्तविक संदेश पर केन्द्रित करते हैं। इन समस्त कारणों से हमें विश्वास है कि आप श्रीमद्भगवद्गीता के इस परिचय को प्रबोधन करने वाला और व्यक्तिगत परिवर्तन लाने में सहायक पायेंगे।
